Poem by Shailendra Mishra

ये हवाओं के चलते थपेड़े,शायद हम सबसे कुछ बोले।अगर जिंदगी जीनी है तो,चलते जाओ, चलते जाओ,तेज और तेज, इतनी तेज की पीछे मुड़कर देख न सको, जो सही है तुमने दुश्वारियां , अपनों द्वारा की गई टिप्पणीयां , जीवन को जीने का राह दिखाती हैं, हमें कांटों के बीच भी जीना है ये भी सिखाती है, हवाओं के ये थपेड़े शांत भी पड़ जाते हैं, हमें अपने आवेगों को शांत रखने की राह बताते हैं, वहीं से जिंदगी फिर से आगे बढ़ने का पाठ सिखाती है, जीवन पथ पर बढ़े चलो, ये राह दिखाती है, ये राह दिखाती है।  

By Shailendra Mishra